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कवासी लखमा जमानत अपडेट: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में सुनवाई टाली, अगली डेट 20 जनवरी



रायपुर: छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई, लेकिन अदालत ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों के तर्कों की विस्तार से समीक्षा करने का संकेत दिया और अगली सुनवाई की तारीख 20 जनवरी 2026 तय की है।

मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

छत्तीसगढ़ में पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान कथित तौर पर शराब नीति में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं, जिससे राज्य को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा जांच में पूर्व मंत्री कवासी लखमा, भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। आरोप है कि शराब व्यापारियों से कमीशन लेकर नीतियां बदली गईं और सरकारी खजाने को भारी चपत लगी। कुछ रिपोर्ट्स में 64 करोड़ रुपये के कमीशन का भी जिक्र है।
कवासी लखमा को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और वे काफी समय से जेल में थे। उनकी जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद सुनवाई हुई।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने जमानत पर जल्दी सुनवाई का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि जांच अभी जारी है, जिसमें मंत्रियों, राजनीतिक पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। जेठमलानी ने कहा कि घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है, इसलिए मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

अदालत ने सभी बिंदुओं पर गहन विचार करने की बात कही और फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कवासी लखमा और अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत मिली है, लेकिन यह अस्थायी राहत है और अंतिम फैसला मुख्य याचिका के साथ होगा।

राजनीतिक और कानूनी महत्व

यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में गरमा रहा है, क्योंकि इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के परिवार और कई कांग्रेस नेताओं का नाम जुड़ा है। ED की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल कवासी लखमा के लिए, बल्कि पूरे घोटाले की जांच की दिशा तय कर सकता है।

अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी, जब अदालत विस्तार से सभी पक्ष सुन सकती है। इस बीच, जांच एजेंसियां अपनी दलीलें मजबूत करने में जुटी हैं।

(नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और अदालत की सुनवाई पर आधारित है। अंतिम फैसला अदालत द्वारा ही आएगा।)

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