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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को झटका! माघ मेला प्रशासन ने 24 घंटे में 'शंकराचार्य' टाइटल साबित करने का नोटिस थमाया, धरना-अनशन जारी – क्या होगा अब?


 
प्रयागराज, 20 जनवरी 2026 – प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या पर हुए विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।ज्योतिषपीठ (ज्योतिरमठ, बद्रीनाथ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेला प्रशासन ने 24 घंटे का नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस के बावजूद वे अपने नाम के आगे "शंकराचार्य" क्यों लिख रहे हैं और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य होने का दावा कैसे कर रहे हैं?

स्वामी जी मौनी अमावस्या (19 जनवरी) से अनशन और धरने पर बैठे हैं। वे आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने उनकी पालकी/शोभायात्रा रोकी, शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया और अपमान किया। उन्होंने कहा – "मां गंगा से मिलने के लिए परमिशन नहीं चाहिए। सम्मानजनक प्रोटोकॉल के साथ स्नान करवाएं, तब तक नहीं मानेंगे।" वे फुटपाथ पर रहने का ऐलान भी कर चुके हैं और हर माघ मेले में आने का प्रण लिया है।

विवाद की पूरी कहानी

मौनी अमावस्या पर क्या हुआ? स्वामी जी अपनी पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। भीड़ के कारण प्रशासन ने रोक दिया। इससे शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प हुई, स्टाम्पेड जैसी स्थिति बनी।

प्रशासन का पक्ष: मेला कमिश्नर सौम्या अग्रवाल और पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा – "भीड़ का दबाव था, अपमान नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कोई भी ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य नियुक्त नहीं हो सकता जब तक केस लंबित है।"

नोटिस का मुख्य बिंदु: सुप्रीम कोर्ट की रोक का हवाला देकर कहा गया कि शिविर के बोर्ड पर "शंकराचार्य" लिखना गलत है। 24 घंटे में जवाब मांगा गया, वरना कार्रवाई संभव।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: कांग्रेस, सपा और कुछ हिंदू संगठनों ने समर्थन किया। अखिलेश यादव ने फोन कर समर्थन जताया। कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए।

यह विवाद पुराना है – स्वामी जी को उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के बाद पद मिला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में 2022 से स्टे है। माघ मेला में यह फिर उभरा, जिससे धार्मिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।

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