रायपुर: पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने केंद्रीय बजट 2026-27 को निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस बजट से देश के किसी भी वर्ग को कोई खास राहत नहीं मिली है, जबकि छत्तीसगढ़ को पूरी तरह उपेक्षित किया गया है। बघेल ने आरोप लगाया कि बजट में अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के हितों को ध्यान में रखा गया है, लेकिन आम किसान, मजदूर, मिडिल क्लास और युवाओं के लिए कुछ नहीं है।
भूपेश बघेल ने मीडिया से बातचीत में कहा, "यह बजट प्रतिगामी है। न कृषि के लिए कुछ है, न उद्योग के लिए, न रोजगार के लिए और न ही मजदूरों के लिए। शेयर मार्केट धराशाई हो गया है, मिडिल क्लास को कोई राहत नहीं मिली। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। सिर्फ शराब महंगी हो गई और मछली सस्ती हो गई – यही इस बजट की सबसे बड़ी उपलब्धि दिखाई दे रही है।"
उन्होंने आगे कहा कि शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने और उसकी कीमत बढ़ाने से अवैध शराब का कारोबार और बढ़ेगा, जो समाज के लिए हानिकारक होगा।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर तीखा हमला,
पूर्व मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में चल रही धान खरीदी की समस्या पर भी केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "डबल इंजन की सरकार धान खरीदी नहीं कर पाई। 31 जनवरी निकल गई, लेकिन किसान सड़कों पर धरने दे रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद कहा था कि यह 'मोदी की गारंटी' है – 31 सौ रुपये प्रति क्विंटल में सबका धान खरीदा जाएगा। लेकिन किसी का धान नहीं बिका। छोटे किसानों को मजबूरन समर्पण कराया गया, जबकि बड़े किसानों को टोकन तक नहीं मिला। भाजपा के नेता खुद अपना धान नहीं बेच पाए, तो आम किसान का क्या हाल होगा?"
छत्तीसगढ़ को 'अडानी के लिए छोड़ दिया गया' – बघेल का आरोप
बघेल ने बजट को छत्तीसगढ़-विरोधी बताते हुए कहा कि केंद्र ने राज्य को बड़े उद्योगपतियों के हवाले कर दिया है। उन्होंने कहा, "छत्तीसगढ़ को अडानी के लिए छोड़ दिया गया है। बजट में राज्य के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है, जबकि यहां के किसानों, आदिवासियों और मजदूरों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।"
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बजट को "विकसित भारत की दिशा में ऐतिहासिक दस्तावेज" बताया है, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी इसे छत्तीसगढ़ के लिए निराशाजनक करार दिया है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक स्थिरता, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और रोजगार सृजन पर फोकस किया है, लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह आम आदमी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।

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