क्या है पूरा मामला? 2017 का वो विवाद जो आज भी चर्चा में
साल 2017 में छत्तीसगढ़ में तब सुर्खियां बटोरी थीं जब तत्कालीन कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक अश्लील वीडियो सीडी जारी की थी। आरोप था कि इस सीडी में तब के मंत्री राजेश मुनत की आपत्तिजनक तस्वीरें/वीडियो हैं, जिसका मकसद उनकी छवि खराब करना था।
बाद में CBI ने जांच संभाली और भूपेश बघेल समेत कई लोगों पर फर्जी वीडियो बनाने, प्रचारित करने और IT एक्ट की धारा 67(2) के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपियों पर BNS की धारा 469 और 471 भी लगीं।
2025 में मिली राहत, 2026 में उल्टा पड़ गया!
- मार्च 2025 में CBI की निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) ने भूपेश बघेल को सभी आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया था।
- कोर्ट ने कहा था कि ट्रायल चलाने लायक पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
- लेकिन CBI ने इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल की।
- अब 24 जनवरी 2026 को स्पेशल CBI कोर्ट (सेशन कोर्ट) ने CBI की याचिका मंजूर कर ली और निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया।
कोर्ट का साफ कहना है – मामला आगे बढ़ेगा, सभी आरोपियों (भूपेश बघेल सहित) के खिलाफ सुनवाई होगी।
राजनीतिक गलियारों में हलचल: कांग्रेस vs BJP
- कांग्रेस नेता इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं
- BJP का कहना है कि सच सामने आ रहा है, कानून अपना काम कर रहा है।
- भूपेश बघेल के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे हाई कोर्ट में अपील करेंगे और इस फैसले को चुनौती देंगे।
अब क्या होगा आगे?
- ट्रायल शुरू होने पर गवाहों की जांच, क्रॉस-एक्जामिनेशन और सबूत पेश होंगे।
- अगर हाई कोर्ट स्टे दे देता है तो मामला रुक सकता है, वरना यह केस 2026-27 में भी सुर्खियां बटोरता रहेगा।
- छत्तीसगढ़ में गणतंत्र दिवस के ठीक पहले यह खबर राजनीतिक माहौल को गरमा रही है।
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यह केस सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सियासत का सबसे बड़ा ड्रामा बन चुका है। क्या भूपेश बघेल इस बार भी बच निकलेंगे या मामला उनके राजनीतिक करियर पर भारी पड़ेगा? अपडेट्स के लिए बने रहिए!

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