रायपुर, 29 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े 2017 के अश्लील सीडी (सेक्स CD) कांड में अब बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट ने 24 जनवरी 2026 को मजिस्ट्रेट कोर्ट के मार्च 2025 के डिस्चार्ज आदेश को रद्द कर दिया है। CBI की रिव्यू पिटीशन को मंजूर करते हुए कोर्ट ने पूर्व CM भूपेश बघेल सहित सभी आरोपियों के खिलाफ ट्रायल दोबारा शुरू करने का आदेश दिया है। इस मामले में पहली सुनवाई 23 फरवरी 2026 को तय की गई है।
केस का पूरा बैकग्राउंड और ताजा अपडेट:
- 2017 का कांड: यह मामला पूर्व मंत्री राजेश मुनत (तत्कालीन PWD मंत्री) से जुड़े कथित फर्जी अश्लील वीडियो के प्रसार से संबंधित है। CBI ने भूपेश बघेल, वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा, कारोबारी कैलाश मुरारका, विजय भाटिया समेत कई लोगों को चार्जशीट में नामित किया था।
- मार्च 2025 फैसला: स्पेशल CBI कोर्ट ने सबूतों की कमी बताकर भूपेश बघेल को सभी आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया था।
- जनवरी 2026 अपडेट: CBI ने इस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की। 24 जनवरी को स्पेशल CBI कोर्ट ने लोअर कोर्ट का आदेश पलट दिया और ट्रायल फिर से शुरू करने का निर्देश दिया। अन्य आरोपियों की अपील भी खारिज हो गई।
- आरोप: भूपेश बघेल पर IPC की धारा 469, 471 और IT एक्ट की धारा 67(2) के तहत केस दर्ज है।
भूपेश बघेल और कांग्रेस की प्रतिक्रिया:
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। उनके वकीलों ने कहा कि वे इस फैसले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। बघेल ने कहा, "हम पहले ही बरी हो चुके थे, अब हाईकोर्ट से राहत लेंगे। यह केस न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन हम लड़ेंगे।" कांग्रेस नेता इसे केंद्र की एजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण बता रहे हैं।
राजनीतिक प्रभाव:
यह मामला 2018 विधानसभा चुनाव से पहले भी सुर्खियों में रहा था, जब भूपेश बघेल को गिरफ्तार किया गया और बाद में जमानत मिली। अब ट्रायल दोबारा शुरू होने से छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। BJP इसे कानून की जीत बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे विपक्षी दबाने की कोशिश कह रही है।

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